सभी विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने संबंधी माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश स्वागतयोग्य: अभाविप
दि. 2 फरवरी 2026
-: प्रेस विज्ञप्ति :-
सभी विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने संबंधी माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश स्वागतयोग्य: अभाविप
अभाविप का 'ऋतुमति अभियान' मासिक धर्म संबंधी जागरूकता के लिए दे रहा महत्वपूर्ण योगदान
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देश के समस्त विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, कार्यात्मक शौचालयों एवं मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता सुनिश्चित करने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करती है। न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार तथा अनुच्छेद 21(ए) के अंतर्गत शिक्षा के अधिकार से जोड़कर देखना नारी स्वास्थ्य, गरिमा एवं शैक्षिक निरंतरता की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय है।
अभाविप की लंबे समय से यह स्पष्ट मांग रही है कि मासिक धर्म स्वच्छता को किसी सामाजिक संकोच या कलंक के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सम्मान एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता के दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए। आज भी देश के अनेक क्षेत्रों में सैनिटरी सुविधाओं के अभाव में छात्राएँ विद्यालय छोड़ने को विवश होती हैं अथवा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय ऐसे सभी अवरोधों को दूर करने की दिशा में एक सशक्त संवैधानिक हस्तक्षेप है, जो सामाजिक न्याय एवं लैंगिक समानता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
उल्लेखनीय है कि अभाविप द्वारा बीते कई वर्षों से शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज में महिला स्वास्थ्य तथा मासिक धर्म संबंधी जागरूकता के लिए संचालित ‘ऋतुमति अभियान’ ने इस संबंध में व्यापक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है।इस अभियान के माध्यम से अभाविप देशभर में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लाखों वंचित महिलाओं एवं बालिकाओं तक नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन पहुँचाने का कार्य कर रही है। इस अभियान के अंतर्गत समय-समय पर अखिल भारतीय स्तर पर सर्वेक्षण किए गए हैं, जिनके माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं के आधार पर प्रभावी कार्ययोजनाएँ तैयार की जाती रही हैं। इन पहलों के माध्यम से शैक्षणिक परिसरों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों की स्थापना, स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की उपलब्धता तथा छात्राओं के स्वास्थ्य एवं गरिमा से जुड़े विषयों को अभाविप ने सदैव राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रखा है।
इसी क्रम में अभाविप द्वारा फरवरी-मार्च 2025 में देशभर में छात्रा सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 38,072 छात्राओं ने सहभागिता की। यह सर्वेक्षण शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं स्वावलंबन, इन चार प्रमुख विषयों पर आधारित था, जिसका उद्देश्य छात्राओं के जीवन से जुड़े इन पहलुओं का वास्तविक आकलन करना था। इसके अतिरिक्त, अभाविप ने दिनांक 10 मार्च 2025 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय छात्रा संसद के माध्यम से महिला स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा एवं स्वावलंबन से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मांग-पत्र सौंपा था। इस मांग-पत्र में शैक्षणिक संस्थानों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन की अनिवार्यता तथा विद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रमुख माँग सम्मिलित थी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय मंत्री सुश्री क्षमा शर्मा ने कहा,“मासिक धर्म स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि छात्राओं की गरिमा, आत्मसम्मान और शिक्षा से निरंतर जुड़ाव का प्रश्न है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश देश की करोड़ों बालिकाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला है और अभाविप द्वारा वर्षों से किए जा रहे प्रयासों को संवैधानिक समर्थन प्रदान करता है।”
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय मंत्री सुश्री पायल किनाके ने कहा,“माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं के दैनिक जीवन से जुड़ी एक व्यावहारिक आवश्यकता को पहचानता है। इससे शिक्षा के मार्ग में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलेगी।अभाविप जमीनी स्तर पर कार्यरत एक छात्र संगठन के रूप में यह अनुभव करती रही है कि मासिक धर्म स्वच्छता की अनुपलब्धता छात्राओं को असमान परिस्थितियों में खड़ा कर देती है। इसी अनुभव के आधार पर अभाविप द्वारा वर्षों से जागरूकता एवं सहयोगात्मक पहलें संचालित की जाती रही हैं। अभाविप इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक जनजागरूकता, संस्थागत सहयोग एवं सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाएगी।”
(यह प्रेस विज्ञप्ति केन्द्रीय कार्यालय मंत्री श्री सौरभ पाण्डेय द्वारा जारी की गई है।)